(N/A) आदर्श गैस समीकरण $PV = nRT$ यह मानता है कि गैस के अणु बिंदु द्रव्यमान हैं और उनके बीच कोई अंतर-आणविक बल नहीं है। वास्तविक गैसें आणविक आकर्षण और सीमित आणविक आयतन के कारण इस व्यवहार से विचलित होती हैं।
$1$. दाब में सुधार: वास्तविक गैस के अणुओं के बीच आकर्षण बल होते हैं। जब कोई अणु पात्र की दीवार से टकराता है,तो वह अन्य अणुओं द्वारा पीछे खींचा जाता है,जिससे प्रभाव बल कम हो जाता है। प्रेक्षित दाब $p$,आदर्श दाब $p_{ideal}$ से कम होता है। सुधार पद घनत्व के वर्ग $\frac{n^2}{V^2}$ के समानुपाती होता है। अतः,$p_{ideal} = p + \frac{an^2}{V^2}$,जहाँ $a$ वान डर वाल्स स्थिरांक है जो आकर्षण बल का परिमाण दर्शाता है।
$2$. आयतन में सुधार: वास्तविक गैस के अणुओं का एक निश्चित आयतन होता है। गति के लिए उपलब्ध प्रभावी आयतन $V - nb$ है,जहाँ $b$ प्रति मोल अपवर्जित आयतन है।
इन मानों को आदर्श गैस समीकरण $p_{ideal} V_{ideal} = nRT$ में रखने पर:
$(p + \frac{an^2}{V^2})(V - nb) = nRT$.